श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 46
 
 
श्लोक  1.16.46 
विप्र कहे श्लोके नाहि दो षेर आभास ।
उपमालङ्कार गुण, किछु अनुप्रास ॥46॥
 
 
अनुवाद
ब्राह्मण ने उत्तर दिया, "उस श्लोक में लेशमात्र भी दोष नहीं है। बल्कि, उसमें उपमा और अनुप्रास जैसे अच्छे गुण हैं।"
 
The Brahmin replied, "There is not even the slightest flaw in this verse. Rather, it is imbued with the excellent qualities of simile and alliteration."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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