श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 35
 
 
श्लोक  1.16.35 
तोमार कवित्व किछु शुनिते हय मन ।
कृपा करि’ कर यदि गङ्गार वर्णन ॥35॥
 
 
अनुवाद
"अतः मैं आपकी काव्य-कौशल सुनना चाहता हूँ। यदि आप कृपा करके माँ गंगा की महिमा का वर्णन करें, तो हम यह सुन सकते हैं।"
 
"Therefore, I wish to hear from you your poetic skill. If you would kindly describe the glory of Mother Ganga, we would all listen."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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