व्याकरण पड़ाह, निमात्रि पण्डित तोमार नाम ।
बाल्य - शास्त्रे लोके तोमार कहे गुण - ग्राम ॥31॥
Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93
Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
अनुवाद
"मैं जानता हूँ कि आप व्याकरण के शिक्षक हैं," उन्होंने कहा, "और आपका नाम निमाई पंडित है। लोग शुरुआती व्याकरण के आपके शिक्षण की बहुत प्रशंसा करते हैं।
He said, "I understand that you are a grammar teacher and your name is Nimai Pandit. People greatly praise your teaching of children's grammar."
तात्पर्य
पहले के संस्कृत स्कूलों में व्याकरण को बहुत विस्तार से पढ़ाया जाता था और यह प्रणाली आज भी जारी है। एक छात्र को अपने जीवन के शुरूआती बारह सालों तक व्याकरण का सावधानी से अध्ययन करना होता था क्योंकि अगर कोई संस्कृत भाषा के व्याकरण में पारंगत है तो सभी शास्त्र उसके लिए खुल जाते हैं। श्री चैतन्य महाप्रभु छात्रों को व्याकरण पढ़ाने के लिए प्रसिद्ध थे और इसलिए केशव कश्मीरी ने सबसे पहले व्याकरण के शिक्षक के रूप में उनके पद का उल्लेख किया। केशव कश्मीरी अपने साहित्यिक कैरियर पर बहुत गर्व करते थे। वह व्याकरण की शुरुआती शिक्षा से कहीं आगे निकल चुके थे और इसलिए वह निमाई पण्डित का पद अपने पद की तुलना में बिल्कुल भी नहीं मानते थे।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥