श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 30
 
 
श्लोक  1.16.30 
वसाइला तारे प्रभु आदर करिया ।
दिग्विजयी कहे मने अवज्ञा करिया ॥30॥
 
 
अनुवाद
भगवान ने उनका आदरपूर्वक स्वागत किया, किन्तु केशव कश्मीरी बहुत अभिमानी थे, इसलिए उन्होंने भगवान से बहुत असावधानी से बात की।
 
Mahaprabhu welcomed him respectfully, but Keshav Kashmiri was very arrogant, so he spoke to Mahaprabhu with disdain.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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