श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 16: महाप्रभु की बाल्य तथा कैशोर लीलाएँ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.16.26 
वृन्दावन - दास इहा करियाछेन विस्तार ।
स्फुट नाहि करे दोष - गुणेर विचार ॥26॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावन दास ठाकुर ने पहले ही इसका विस्तृत वर्णन किया है। जो स्पष्ट है, उसके गुणों और दोषों की जाँच करने की आवश्यकता नहीं है।
 
Vrindavana Dasa Thakura has already described this in detail. There is no need to examine the merits and demerits of what is clear.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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