श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.15.33 
अतएव दिंमात्र इहाँ देखाइल ।
‘चैतन्य मङ्गले’ सर्व - लोके ख्यात हैल ॥33॥
 
 
अनुवाद
मैंने इन लीलाओं का केवल एक संकेत दिया है, क्योंकि वृन्दावन दास ठाकुर ने अपने ग्रन्थ चैतन्य-मंगल (अब चैतन्य-भागवत) में इन सभी का विशद वर्णन किया है।
 
I have only hinted at these pastimes, because Vrindavana Dasa Thakura has described them in detail in his book Chaitanya Mangala (now Chaitanya Bhagavata).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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