श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  1.15.31 
विस्तारिया वर्णिला ताहा वृन्दावन - दास ।
एइ त’ पौगण्ड - लीलार सूत्र - प्रकाश ॥31॥
 
 
अनुवाद
वृन्दावनदास ठाकुर ने भगवान की प्रारंभिक लीलाओं का विस्तृत वर्णन किया है। मैंने जो कुछ दिया है, वह उन्हीं लीलाओं का संक्षिप्त विवरण मात्र है।
 
Vrindavana Dasa Thakura has described all these divine pastimes of Mahaprabhu in detail. I have presented only a brief version of these pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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