एइ मत नाना लीला करे गौरहरि ।
कि कारणे लीला , - इहा बुझिते ना पारि ॥22॥
अनुवाद
इस प्रकार भगवान चैतन्य महाप्रभु ने अनेक लीलाएँ कीं, किन्तु उन्होंने ऐसा क्यों किया, यह मैं समझ नहीं पाता।
In this way Chaitanya Mahaprabhu performed many pastimes, but I cannot understand why he did so.
तात्पर्य
परमेश्वर और उनके भक्त इस विश्व में किसी मिशन को पूरा करने के लिए आते हैं और इसलिए कभी-कभी उनकी गतिविधियां समझ में आने में कठिन होती हैं इसलिए यह कहा जाता है कि वैष्णवर की क्रिया-मुद्रा विज्ञे हेना बुझयह ना : चाहे कोई कितना भी विद्वान और बुद्धिमान क्यों ना हो, वह एक वैष्णव की गतिविधियों को समझ नहीं सकता है। एक वैष्णव अपने मिशन के निष्पादन के लिए कुछ भी स्वीकार करता है। पर मूर्ख व्यक्ति इस प्रकार के महान वैष्णवों के उद्देश्य को न जानकर उनकी आलोचना करते हैं। यह निषिद्ध है। चूँकि कोई भी यह समझ नहीं सकता कि एक वैष्णव अपने मिशन के निष्पादन में क्या करता है इसलिए ऐसे वैष्णव की आलोचना करना साधु-निंदा कहलाता है।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥