श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.15.2 
जय जय श्री - चैतन्य जय नित्यानन्द ।
जयाद्वैतचन्द्र, जय गौर - भक्त - वृन्द ॥2॥
 
 
अनुवाद
भगवान चैतन्य महाप्रभु की जय हो! भगवान नित्यानंद प्रभु की जय हो! अद्वैत आचार्य की जय हो! और भगवान चैतन्य के सभी भक्तों की जय हो!
 
Victory to Sri Chaitanya Mahaprabhu! Victory to Sri Nityananda Prabhu! Victory to Sri Advaita Acharya and victory to the devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu!
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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