श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  1.15.19 
आमि कहि , - आमार अनाथ पिता - माता ।
आमि बालक, सन्यासेर किबा जानि कथा ॥19॥
 
 
अनुवाद
मैंने विश्वरूप से कहा, 'मेरे माता-पिता तो असहाय हैं, और मैं तो अभी बालक ही हूँ। संन्यास-जीवन के विषय में मैं क्या जानता हूँ?'
 
"I said to Visvarupa, 'My parents are helpless, and I am still a child. What do I know about renunciation?'
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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