श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 15: महाप्रभु की पौगण्ड-लीलाएँ  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.15.13 
शुनि, शची - मिश्रेर दुःखी हैल मन ।
तबे प्रभु माता - पितार कैल आश्वासन ॥13॥
 
 
अनुवाद
जब शचीमाता और जगन्नाथ मिश्र को अपने बड़े पुत्र विश्वरूप के चले जाने का समाचार मिला तो वे बहुत दुखी हुए, किन्तु भगवान चैतन्य ने उन्हें सांत्वना देने का प्रयास किया।
 
When Shachimata and Jagannatha Mishra heard the news of the departure of their eldest son Visvarupa, they were deeply saddened, but Sri Chaitanya Mahaprabhu tried to console them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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