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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 94
 
 
श्लोक  1.14.94 
कत दिने मिश्र पुत्रेर हाते खड़ि दिल ।
अल्प दिने द्वादश - फला अक्षर शिखिल ॥94॥
 
 
अनुवाद
कुछ दिनों बाद जगन्नाथ मिश्र ने हाटे खड़ी संस्कार करके अपने पुत्र की प्राथमिक शिक्षा का शुभारंभ किया। कुछ ही दिनों में भगवान ने सभी अक्षर और अक्षरों के संयोजन सीख लिए।
 
A few days later, Jagannath Mishra performed his son's Hatekhari ceremony and began his elementary education. Within a few days, Mahaprabhu learned all the letters and compound letters.
तात्पर्य
हिंदी-पाठ बारह फला अर्थात अक्षरों के समूह को क्रमशः रेफ, मूर्धन्य (तालव्य), ण, दंतव्य (दंती), न, म, य, र, ल, व, ऋ, ऋ तथा ळ एवं ळ कहा गया है। हाथे खाडी प्रारंभिक शिक्षा का प्राथमिक सोपान है। चार या पाँच वर्ष की आयु में प्रारंभिक शिक्षा के प्रारंभ के लिए विद्यारंभ नामक शुभ दिन में विष्णु भगवान की आराधना के साथ एक संस्कार होता है और उसके बाद शिक्षक छात्र को एक लंबी खड़िया देता है। फिर छात्र के हाथ का मार्गदर्शन करते हुए उसे फर्श पर बड़े-बड़े अक्षर लिखकर उसे वर्णमाला (अ, आ, इ आदि) के अक्षरों को लिखने के लिए निर्देशित करता है। जब बच्चा लिखने में थोड़ा निपुण हो जाता है तो उसे अपनी प्रारंभिक शिक्षा के लिए एक स्लेट दिया जाता है, जिसका अंत दो अक्षरों के उक्त फला नामक योग को सीखने पर समाप्त हो जाता है।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)