श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  1.14.89 
मिश्र कहे , - “पुत्र केने नहे नारायण ।
तथापि पितार धर्मपुत्रेर शिक्षण” ॥89॥
 
 
अनुवाद
जगन्नाथ मिश्र ने उत्तर दिया, "भले ही मेरा पुत्र कोई सामान्य व्यक्ति न होकर नारायण हो, फिर भी एक पिता का कर्तव्य है कि वह अपने पुत्र को शिक्षा दे।"
 
Jagannath Mishra said, “Even if my son is not an ordinary man but Narayan himself, it is still the duty of a father to educate his son.”
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd