श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.14.63 
ताँरे देखि’ प्रभुर हइल साभिलाष मन ।
लक्ष्मी चित्ते प्रीत पाइल प्रभुर दर्शन ॥63॥
 
 
अनुवाद
लक्ष्मीदेवी को देखकर भगवान् उनके प्रति आसक्त हो गये और भगवान् को देखकर लक्ष्मी के मन में महान् संतोष हुआ।
 
Seeing Lakshmi Devi, Mahaprabhu fell in love with her and seeing Mahaprabhu, Lakshmi felt immense satisfaction in her heart.
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd