श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 14: श्री चैतन्य महाप्रभु की बाल-लीलाएँ  »  श्लोक 58
 
 
श्लोक  1.14.58 
यदि नैवेद्य ना देह हइया कृपणी ।
बुड़ा भर्ता हवे, आर चारि चारि सतिनी ॥58॥
 
 
अनुवाद
"यदि तुम लोग कंजूस हो और मुझे भेंट नहीं दोगे, तो तुममें से प्रत्येक का पति बूढ़ा होगा और उसकी कम से कम चार सह-पत्नियाँ होंगी।"
 
“If you are stingy and do not offer me gifts, each of you will get an old husband and at least four co-wives.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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