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अनुवाद
शचीमाता बोलीं, "तुम दूसरों की चीज़ें क्यों चुराते हो? दूसरे बच्चों को क्यों मारते हो? और दूसरों के घरों में क्यों जाते हो? तुम्हारे अपने घर में क्या नहीं है?"
Shachimata said, "Why do you steal other people's things? Why do you beat other boys? Why do you go inside other people's houses? After all, what is there that you don't have in your house?"
तात्पर्य
वेदांत-सूत्र (जन्माद्यस्य यतः) के अनुसार, निर्माण, रखरखाव और विनाश सर्वोच्च असीमित में मौजूद हैं, इसलिए जो कुछ भी हम इस भौतिक दुनिया में पाते हैं वह पहले से ही आध्यात्मिक दुनिया में है। श्री चैतन्य महाप्रभु भगवान की सर्वोच्च विभूति हैं, स्वयं कृष्ण हैं। वह चोरी कैसे कर रहे हैं, और कैसे लड़ रहे हैं? यह चोर या दुश्मन के रूप में नहीं बल्कि एक दोस्त के रूप में एक प्रेमपूर्ण स्थिति में है। वह एक बच्चे के रूप में चोरी करता है इसलिए नहीं कि वह जरूरतमंद है बल्कि एक स्वाभाविक प्रवृत्ति से। इस भौतिक दुनिया में भी, छोटे बच्चे, बिना किसी दुश्मनी या बुरी इच्छा के, कभी-कभी पड़ोसी के घर जाते हैं और चोरी करते हैं, और कभी-कभी वे लड़ते हैं। कृष्ण भी, अन्य बच्चों की तरह, अपने बचपन में ये सब चीजें करते थे। आध्यात्मिक दुनिया में चोरी करने और लड़ने की प्रवृत्ति के बिना, वे यहां इस भौतिक दुनिया में मौजूद नहीं हो सकते। भौतिक और आध्यात्मिक दुनिया के बीच अंतर यह है कि आध्यात्मिक दुनिया में चोरी दोस्ती और प्रेम में की जाती है, जबकि इस भौतिक दुनिया में लड़ाई और चोरी दुश्मनी और ईर्ष्या के आधार पर की जाती है। इसलिए हमें यह समझना चाहिए कि आध्यात्मिक दुनिया में ये सभी गतिविधियां मौजूद हैं, लेकिन वहां कोई नशा नहीं है, जबकि भौतिक दुनिया में सभी गतिविधियाँ दयनीय स्थितियों से भरी हैं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥