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श्लोक 27
श्लोक
1.14.27
कान्दिया बलेन शिशु, - केने कर रोष ।
तुमि माटि खाइते दिले, मोर किबा दोष ॥27॥
अनुवाद
रोते हुए बच्चे ने अपनी माँ से पूछा, "तुम नाराज़ क्यों हो? तुमने तो मुझे मिट्टी खाने को दे दी है। मेरा क्या कसूर है?"
The crying boy asked his mother, "Why are you angry? You only gave me mud to eat. What is my fault in this?"
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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