श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  1.13.91 
अ - कलङ्क गौरचन्द्र दिला दरशन ।
स - कलङ्क चन्द्रे आर को प्रयोजन ॥91॥
 
 
अनुवाद
जब चैतन्य महाप्रभु का निष्कलंक चन्द्रमा दिखाई देने लगा, तो उसके शरीर पर काले चिह्नों से भरे चन्द्रमा की क्या आवश्यकता थी?
 
When the spotless moon in the form of Sri Chaitanya Mahaprabhu was seen, then what was the need for the blemished moon?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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