श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 89
 
 
श्लोक  1.13.89 
चौद्द - शत सात - शके मास ये फाल्गुन ।
पौर्णमासीर सन्ध्या - काले हैले शुभ - क्षण ॥89॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार शक संवत 1407 [1486 ई.] में फाल्गुन माह [फरवरी-मार्च] में पूर्णिमा के दिन संध्या के समय इच्छित शुभ घड़ी आ गई।
 
Thus, the desired auspicious moment arrived on the evening of the full moon day in the month of Phalguna (February-March) of Shaka Samvat 1407 (1486 AD).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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