श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  1.13.83 
शची कहे , - मुञि देखों आकाश - उपरे ।
दिव्य - मूर्ति लोक सब येन स्तुति करे ॥83॥
 
 
अनुवाद
शचीमाता ने अपने पति से कहा, "मैं बाह्य अंतरिक्ष में अद्भुत प्रतिभाशाली मनुष्यों को प्रकट होते हुए देख रही हूँ, मानो वे प्रार्थना कर रहे हों।"
 
Shachimata said to her husband, “I see very strange radiant men appearing in the outer sky, as if they are praising.”
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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