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श्लोक 1.13.8  |
श्री - कृष्ण - चैतन्य नवद्वीपे अवतरि ।
आट - चल्लिश वत्सर प्रकट विहरि ॥8॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान श्री चैतन्य महाप्रभु नवद्वीप में प्रकट होकर अड़तालीस वर्षों तक अपनी लीलाओं का आनन्द लेते रहे। |
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| Sri Chaitanya Mahaprabhu appeared in Navadvipa and remained there for forty-eight years and enjoyed His pastimes. |
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