श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 75
 
 
श्लोक  1.13.75 
बलदेव - प्रकाश - परम - व्योमे ‘सङ्कर्षण’ ।
तेह - विश्वेर उपादान - निमित्त - कारण ॥75॥
 
 
अनुवाद
आध्यात्मिक जगत में बलदेव का विस्तार, जिसे संकर्षण के नाम से जाना जाता है, इस भौतिक ब्रह्मांडीय अभिव्यक्ति का घटक और तात्कालिक कारण है।
 
In the spiritual world, the parts of Baladeva are called Sankarshana, who are the material and direct causes of this material world.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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