श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.13.7 
प्रथमे त’ सूत्र - रूपे करिये गणन ।
पाछे ताहा विस्तारि करिब विवरण ॥7॥
 
 
अनुवाद
पहले मैं भगवान की लीलाओं का सारांश प्रस्तुत करता हूँ। फिर मैं उनका विस्तार से वर्णन करूँगा।
 
First, I will summarize the pastimes of Mahaprabhu. Then, I will describe them in detail.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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