श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  1.13.66 
ताँर सङ्गे आनन्द करे वैष्णवेर गण ।
कृष्ण - कथा, कृष्ण - पूजा, नाम - सङ्कीर्तन ॥66॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य के घर में सभी वैष्णव सदैव कृष्ण की चर्चा करने, सदैव कृष्ण की पूजा करने तथा सदैव हरे कृष्ण महामंत्र का जप करने में आनंद लेते थे।
 
All the Vaishnavas always enjoyed talking about Krishna, worshipping Krishna and chanting the Hare Krishna Mahamantra in Advaita Acharya's house.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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