श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 47
 
 
श्लोक  1.13.47 
सेइ, अनुसारे लिखि लीला - सूत्रगण ।
विस्ता रि’ वर्णिआछेन ताहा दास - वृन्दावन ॥47॥
 
 
अनुवाद
श्रीस्वरूप दामोदर और मुरारी गुप्त द्वारा लिखे गए नोट्स इस पुस्तक का आधार हैं। उन्हीं नोट्स के आधार पर, मैं भगवान की सभी लीलाओं का वर्णन करता हूँ। इन नोट्स का वृंदावन दास ठाकुर ने विस्तृत वर्णन किया है।
 
The brief commentaries written by Shri Swarup Damodara and Murari Gupta form the basis of this book. Following these commentaries, I am writing about all the pastimes of Mahaprabhu. These commentaries have been described in detail by Vrindavan Das Thakur.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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