| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव » श्लोक 42 |
|
| | | | श्लोक 1.13.42  | विद्यापति, जयदेव, चण्डीदासेर गीत ।
आस्वादेन रामानन्द - स्वरूप - सहित ॥42॥ | | | | | | | अनुवाद | | भगवान् विद्यापति, जयदेव और चण्डीदास की पुस्तकों का पाठ करते थे, तथा श्रीरामानन्द राय और स्वरूप दामोदर गोस्वामी जैसे अपने विश्वासपात्रों के साथ उनके गीतों का आनन्द लेते थे। | | | | Mahaprabhu used to read the works of Vidyapati, Jayadeva and Chandidas and used to enjoy their songs along with his close associates like Ramanand Rai and Swaroop Damodar Goswami. | | ✨ ai-generated | | |
|
|