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श्लोक 1.13.3  |
जय जय गदाधर जय श्रीनिवास ।
जय मुकुन्द वासुदेव जय हरिदास ॥3॥ |
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| अनुवाद |
| गदाधर प्रभु की जय हो! श्रीवास ठाकुर की जय हो! मुकुंद प्रभु और वासुदेव प्रभु की जय हो! हरिदास ठाकुर की जय हो! |
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| Glory to Lord Gadadhara! Glory to Srivasa Thakura! Glory to Lord Mukunda and Lord Vasudeva! Glory to Haridasa Thakura! |
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