श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  1.13.23 
बाल्य - भाव छले प्रभु करेन क्रन्दन ।
‘कृष्ण’ ‘हरि’ नाम शुनि’ रहये रोदन ॥23॥
 
 
अनुवाद
बचपन में जब भगवान रोते थे तो कृष्ण और हरि नाम सुनते ही तुरन्त रुक जाते थे।
 
In His childhood, when Mahaprabhu was crying, He would immediately stop crying upon hearing the holy names of Krishna and Hari.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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