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श्लोक 1.13.2  |
जय ज य श्री कृष्ण - चैतन्य गौरचन्द्र ।
जयाद्वैतचन्द्र जय जय नित्यानन्द ॥2॥ |
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| अनुवाद |
| श्री कृष्ण चैतन्य महाप्रभु की जय हो! अद्वैतचंद्र की जय हो! भगवान नित्यानंद प्रभु की जय हो! |
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| All glory to Sri Krishna Chaitanya Mahaprabhu! All glory to Sri Advaitachandra! All glory to Sri Nityananda Prabhu! |
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