श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 13: श्री चैतन्य महाप्रभु का आविर्भाव  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  1.13.1 
स प्रसीदतु चैतन्य - देवो यस्य प्रसादतः ।
तल्लीला - वर्णने योग्यः सद्यः स्यादधमोऽप्ययम् ॥1॥
 
 
अनुवाद
मैं भगवान चैतन्य महाप्रभु की कृपा की कामना करता हूँ, जिनकी कृपा से पतित व्यक्ति भी भगवान की लीलाओं का वर्णन कर सकता है।
 
I seek the grace of Sri Chaitanya Mahaprabhu, by whose grace even a lowly person can describe His pastimes.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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