श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 84
 
 
श्लोक  1.12.84 
श्रीनाथ चक्रवर्ती, आर उद्धव दास ।
जितामित्र, काष्ठकाटा - जगन्नाथ - दास ॥84॥
 
 
अनुवाद
पंद्रहवीं शाखा श्रीनाथ चक्रवर्ती, सोलहवीं उद्धव, सत्रहवीं जितमित्र और अठारहवीं जगन्नाथ दास थे।
 
Srinath Chakraborty was the fifteenth, Uddhav was the sixteenth, Jitamitra was the seventeenth and Jagannath Das was the eighteenth.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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