vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री चैतन्य चरितामृत
»
लीला 1: आदि लीला
»
अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार
»
श्लोक 48
श्लोक
1.12.48
शुनिया प्रभुर मन प्रसन्न हइल ।
दुँहार अन्तर - कथा दुँहे से जानिल ॥48॥
अनुवाद
जब चैतन्य महाप्रभु ने यह सुना, तो उनका मन संतुष्ट हो गया। केवल वे ही एक-दूसरे के मन की बात समझ सकते थे।
When Chaitanya Mahaprabhu heard this, his heart was filled with joy. Only they could understand each other's thoughts.
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas