श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  1.12.29 
नीलाचले तेंहो एक पत्रिका लिखिया ।
प्रतापरुद्रेर पाश दिल पाठाइया ॥29॥
 
 
अनुवाद
जब कमलाकांत विश्वास जगन्नाथ पुरी में थे, तो उन्होंने किसी के माध्यम से महाराज प्रतापरुद्र को एक नोट भेजा।
 
When Kamalakant Vishwas was in Jagannath Puri, he sent a letter through someone to Maharaj Prataparudra.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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