Warning: Undefined array key 1 in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 93

Deprecated: nl2br(): Passing null to parameter #1 ($string) of type string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 97
श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  1.12.28 
‘कमलाकान्त विश्वास’ - नाम आचार्य - किङ्कर ।
आचार्य - व्यवहार सब - ताँहार गोचर ॥28॥
 
 
अनुवाद
अद्वैत आचार्य का अत्यंत गोपनीय सेवक, जिसका नाम कमलाकांत विश्वास था, अद्वैत आचार्य के सभी व्यवहारों को जानता था।
 
Kamalakant Vishwas, the most trusted servant of Acharya Advaita, knew all the conduct and behavior of Acharya Advaita.
तात्पर्य
आदि-लीला (10.149) में उल्लेखित नाम कमलांनंद और मध्य-लीला (10.94) में उल्लेखित नाम कमलाकांत, दोनों एक ही व्यक्ति को संदर्भित करते हैं। कमलाकांत, भगवान चैतन्य महाप्रभु के एक बहुत ही गोपनीय सेवक, ज़ो एक ब्राह्मण परिवार में जन्मे थे, ने श्री आदवैत आचार्य की सेवा उनके सचिव के रूप में की। जब परमानंद पुरी नवद्वीप से जगन्नाथपुरी गए, तो वे कमलाकांत विश्वास को अपने साथ ले गए, और वे दोनों जगन्नाथ पुरी में भगवान चैतन्य से मिलने गए। मध्य-लीला (10.94) में उल्लेख किया गया है कि भगवान चैतन्य के एक भक्त, ब्राह्मण कमलाकांत, परमानंद पुरी के साथ जगन्नाथ पुरी गए थे।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)