श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 12: अद्वैत आचार्य तथा गदाधर पण्डित के विस्तार  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.12.25 
तबे महाप्रभु, ताँर हृदे हस्त ध रि’ ।
‘उठह, गोपाल ,’ कैल बल ‘हरि’ ‘हरि’ ॥25॥
 
 
अनुवाद
तब भगवान चैतन्य महाप्रभु ने गोपाल की छाती पर हाथ रखा और उससे कहा, "मेरे प्रिय गोपाल, उठो और भगवान के पवित्र नाम का जप करो!"
 
Then Chaitanya Mahaprabhu placed his hand on Gopal's chest and said to him, "Dear Gopal! Get up and chant the holy name of the Lord!"
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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