नित्यानन्द - भृत्य - परमानन्द उपाध्याय ।
श्री - जीव पण्डित नित्यानन्द - गुण गाय ॥44॥
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अनुवाद
परमानंद उपाध्याय नित्यानंद प्रभु के महान सेवक थे। श्री जीव पंडित ने श्री नित्यानंद प्रभु के गुणों की महिमा की।
Paramananda Upadhyaya was a great servant of Nityananda Prabhu and Shri Jeev Pandit used to praise the qualities of Nityananda Prabhu.
तात्पर्य
श्री परमानंद उपाध्याय एक श्रेष्ठ भक्त थे। चैतन्य-भागवत में इनके नाम का उल्लेख है, जहाँ श्री जीव पंडित को भी रत्नगर्भ आचार्य के दूसरे पुत्र और नीत्यानंद प्रभु के पिता हाड़ाई ओझा के बचपन के मित्र के रूप में उल्लेखित किया गया है। गौर-गणोद्देश-दीपिका (169) में कहा गया है कि श्री जीव पंडित पहले इंदिरा नामक गोपी थीं।
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥