"कानू ठाकुर के परिवार में राधा-कृष्ण देवता है जिन्हें प्राणवल्लभ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके परिवार ने भगवान चैतन्य महाप्रभु के आने से बहुत पहले इस देवता की पूजा की थी। जब बंगाल पर महाराष्ट्रीयन हमला हुआ, तो कानू ठाकुर का परिवार बिखर गया, और हमले के बाद उस परिवार का एक हरिकृष्ण गोस्वामी अपने मूल घर, बोधखान वापस आया और प्राणवल्लभ देवता को फिर से स्थापित किया। परिवार के वंशज अभी भी प्राणवल्लभ की सेवा में लगे हुए हैं। कानू ठाकुर खेतरी उत्सव के दौरान उपस्थित थे, जब जाह्नवी देवी और वीरभद्र गोस्वामी भी उपस्थित थे। कानू ठाकुर के परिवार के सदस्यों में से एक, माधवाचार्य ने श्री नित्यानंद प्रभु की बेटी से शादी की, जिसका नाम गंगा देवी था। पुरुषोत्तम ठाकुर और कानू ठाकुर दोनों के ब्राह्मण परिवारों से कई शिष्य थे। कानू ठाकुर के अधिकांश शिष्य वंशज अब मिदनापुर जिले में शिलावती नदी के तट पर स्थित गड़बेता नामक गाँव में रहते हैं।
