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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 40
 
 
श्लोक  1.11.40 
ताँर पुत्र - महाशय श्री - कानु ठाकुर ।
याँर देहे रहे कृष्ण - प्रेमामृत - पूर ॥40॥
 
 
अनुवाद
श्री कानु ठाकुर, एक अत्यंत सम्मानित सज्जन, पुरुषोत्तम दास ठाकुर के पुत्र थे। वे इतने महान भक्त थे कि भगवान कृष्ण सदैव उनके शरीर में निवास करते थे।
 
Shri Kanu Thakur, a very respectable person, was the son of Purushottam Das Thakur. He was such a great devotee that Lord Krishna always resided in his body.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने अपने अनुभाष्य में लिखा है। "श्री कानू ठाकुर के मुख्यालय जाने के लिए, झिकरागाछा घाट स्टेशन से कपोताक्ष नदी तक नाव से जाना पड़ता है। अन्यथा, अगर कोई झिकरागाछा घाट स्टेशन से लगभग दो या ढाई मील आगे जाये, तो वह कानू ठाकुर का मुख्यालय बोधखान देख सकता है। सदाशिव का बेटा पुरुषोत्तम ठाकुर था, और उनका बेटा कानू ठाकुर था। कानू ठाकुर के वंशज उन्हें नागर पुरुषोत्तम के रूप में जानते हैं। कृष्ण-लीला के दौरान उनका नाम दामा था। ऐसा कहा जाता है कि कानू ठाकुर के जन्म के तुरंत बाद, उनकी माँ, जाह्नवी की मृत्यु हो गई थी। जब वह लगभग बारह दिन के थे, तब श्री नित्यानंद प्रभु उन्हें अपने खड़दाहा स्थित घर ले गए थे। यह निश्चित किया गया है कि कानू ठाकुर का जन्म किसी समय बंगाली वर्ष 942 [1535 ई.] में हुआ था। ऐसा कहा जाता है कि उनका जन्म रथ-यात्रा के दिन हुआ था। क्योंकि वह अपने जीवन की शुरुआत से ही भगवान कृष्ण के महान भक्त थे, इसलिए श्री नित्यानंद प्रभु ने उन्हें शिशु कृष्णदास नाम दिया था। जब वह पाँच साल के थे, तब वह जाह्नवी माता के साथ वृंदावन गए, और गोस्वामीगण, कानू ठाकुर की अत्यधिक भक्ति देखकर, उन्हें कनाई ठाकुर नाम दिया।

"कानू ठाकुर के परिवार में राधा-कृष्ण देवता है जिन्हें प्राणवल्लभ कहा जाता है। ऐसा कहा जाता है कि उनके परिवार ने भगवान चैतन्य महाप्रभु के आने से बहुत पहले इस देवता की पूजा की थी। जब बंगाल पर महाराष्ट्रीयन हमला हुआ, तो कानू ठाकुर का परिवार बिखर गया, और हमले के बाद उस परिवार का एक हरिकृष्ण गोस्वामी अपने मूल घर, बोधखान वापस आया और प्राणवल्लभ देवता को फिर से स्थापित किया। परिवार के वंशज अभी भी प्राणवल्लभ की सेवा में लगे हुए हैं। कानू ठाकुर खेतरी उत्सव के दौरान उपस्थित थे, जब जाह्नवी देवी और वीरभद्र गोस्वामी भी उपस्थित थे। कानू ठाकुर के परिवार के सदस्यों में से एक, माधवाचार्य ने श्री नित्यानंद प्रभु की बेटी से शादी की, जिसका नाम गंगा देवी था। पुरुषोत्तम ठाकुर और कानू ठाकुर दोनों के ब्राह्मण परिवारों से कई शिष्य थे। कानू ठाकुर के अधिकांश शिष्य वंशज अब मिदनापुर जिले में शिलावती नदी के तट पर स्थित गड़बेता नामक गाँव में रहते हैं।

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)