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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  1.11.33 
नवद्वीपे पुरुषोत्तम पण्डित महाशय ।
नित्यानन्द - नामे याँर महोन्माद हय ॥33॥
 
 
अनुवाद
नवद्वीप निवासी पुरुषोत्तम पंडित आठवें गोपाल थे। नित्यानंद प्रभु का पवित्र नाम सुनते ही वे लगभग पागल हो जाते थे।
 
Purushottam Pandit, resident of Navadweep, was the eighth Gopal. He used to go crazy on hearing the holy name of Nityananda Mahaprabhu.
तात्पर्य
चैतन्य- भागवत में उल्लेख किया गया है कि पुरुषोत्तम पंडित का जन्म नवद्वीप में हुआ था और वह भगवान नित्यानंद प्रभु के महान भक्त थे। बारह गोपालों में से एक के रूप में, उनका पूर्व नाम स्तोता कृष्ण था।
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)