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श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 11: भगवान् नित्यानन्द के विस्तार  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.11.26 
गौरीदास पण्डित याँर प्रेमोद्दण्ड - भक्ति ।
कृष्ण - प्रेमा दिते, निते, धरे महाशक्ति ॥26॥
 
 
अनुवाद
भगवान के प्रेम में सर्वोच्च भक्ति के प्रतीक, गौरीदास पंडित में ऐसे प्रेम को प्राप्त करने और प्रदान करने की महानतम क्षमता थी।
 
Gauridas Pandit, the epitome of supreme devotion to God, had the great power to receive and bestow such love.
तात्पर्य
श्रील भक्तिसिद्धांत सरस्वती ठाकुर ने अपनी अनुभाष्य में लिखा है, "ऐसा कहा जाता है कि गौरीदास पंडित सदैव राजा कृष्णदास, हरिहोड़ा के पुत्र द्वारा संरक्षण पाते थे। गौरीदास पंडित शालिग्राम गाँव में रहते थे, जो मुड़ागाछा रेलवे स्टेशन से कुछ मील की दूरी पर स्थित है, और बाद में वे अंबिका-कालना में रहने के लिए आये। गौरा-गणोद्देश-दीपिका (128) में कहा गया है कि पूर्व में वे वृंदावन में कृष्ण और बलराम के गोप-बाल सखाओं में से एक, सुबल थे। गौरीदास पंडित सूर्यदास सरखेल के छोटे भाई थे, और अपने बड़े भाई की अनुमति से उन्होंने गंगा तट को अपना निवास बनाया, और अंबिका-कालना नामक नगर में रहने लगे। गौरीदास पंडित की संतति के कुछ नाम निम्नलिखित हैं: (1) श्री नृसिंह-चैतन्य, (2) कृष्णदास, (3) विष्णुदास, (4) बड़ा बलराम दास, (5) गोविंद, (6) रघुनाथ, (7) बड़ू गंगादास, (8) औलिया गंगाराम, (9) यादवाचार्य, (10) हृदय-चैतन्य, (11) चाँदा हलादार, (12) महेश पंडित, (13) मुकुट राय, (14) भाटुया गंगाराम, (15) औलिया चैतन्य, (16) कलिया कृष्णदास, (17) पाटुया गोपाल, (18) बड़ा जगन्नाथ, (19) नित्यानंद, (20) भावी, (21) जगदीश, (22) रइया कृष्णदास और (22) अन्नपूर्णा। गौरीदास पंडित का सबसे बड़ा पुत्र बड़ा बलराम के नाम से जाना जाता था, और सबसे छोटा रघुनाथ के नाम से जाना जाता था। रघुनाथ के पुत्र महेश पंडित और गोविंद थे। गौरीदास पंडित की बेटी अन्नपूर्णा के नाम से जानी जाती थी।

"अंबिका-कालना गाँव, जो शांतिपुर से गंगा नदी के उस पार है, पूर्वी रेलवे पर कालाना-कोर्टा रेलवे स्टेशन से दो मील पूर्व में है। अंबिका-कालना में बर्दवान के जमींदार द्वारा निर्मित एक मंदिर है। मंदिर के सामने एक बड़ा इमली का पेड़ है, और ऐसा कहा जाता है कि गौरीदास पंडित और भगवान चैतन्य महाप्रभु इस पेड़ के नीचे मिले थे। जिस स्थान पर मंदिर स्थित है उसे अंबिका के नाम से जाना जाता है, और क्योंकि यह कालाना क्षेत्र में है, इसलिए इस गाँव को अंबिका-कालना के नाम से जाना जाता है। ऐसा कहा जाता है कि श्री चैतन्य महाप्रभु द्वारा लिखी गई भागवद-गीता की एक प्रति अभी भी इस मंदिर में मौजूद है।"

 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)