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श्लोक 98
श्लोक
1.10.98
अन्न - जल त्याग कैल अन्य - कथन ।
पल दुइ - तिन माठा करेन भक्षण ॥98॥
अनुवाद
रघुनाथ दास गोस्वामी ने धीरे-धीरे भोजन और पेय सब कुछ त्याग दिया, केवल छाछ की कुछ बूँदें ही पी।
Raghunath Das Goswami gradually gave up eating food and started drinking a few drops of mud.
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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