श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 95
 
 
श्लोक  1.10.95 
एइ त निश्चय क रि’ आइल वृन्दावने ।
आसि’ रूप - सनातनेर वन्दिल चरणे ॥95॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार श्रील रघुनाथ दास गोस्वामी वृन्दावन आए, उन्होंने श्रील रूप गोस्वामी और सनातन गोस्वामी से मुलाकात की और उन्हें प्रणाम किया।
 
Thus Srila Raghunatha Dasa Goswami came to Vrindavan and met Srila Rupa Goswami and Sanatana Goswami and paid his respects to them.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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