श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 70
 
 
श्लोक  1.10.70 
जगदीश पण्डित, आर हिरण्य महाशय ।
यारे कृपा कैल बाल्ये प्रभु दयामय ॥70॥
 
 
अनुवाद
इकतीसवीं शाखा जगदीश पंडित थे, और बत्तीसवीं शाखा हिरण्य महाशय थे, जिन पर भगवान चैतन्य ने बचपन में अपनी अहैतुकी कृपा दिखाई थी।
 
The thirty-first branch was Jagadish Pandit and the thirty-second branch was Hiranya Mahashay, on whom Mahaprabhu had shown causeless mercy in his childhood.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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