श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 63
 
 
श्लोक  1.10.63 
श्री - वल्लभसेन, आर सेन श्रीकान्त ।
शिवानन्द - सम्बन्धे प्रभुर भक्त एकान्त ॥63॥
 
 
अनुवाद
श्रीवल्लभ सेना और श्रीकांत सेना भी शिवानंद सेना की उपशाखाएँ थीं, क्योंकि वे न केवल उनके भतीजे थे, बल्कि श्री चैतन्य महाप्रभु के अनन्य भक्त भी थे।
 
Shri Vallabh Sen and Shrikant Sen were also sub-branches of Shivananda Sen, as they were not only his nephews but also ardent devotees of Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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