| श्री चैतन्य चरितामृत » लीला 1: आदि लीला » अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ » श्लोक 31 |
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| | | | श्लोक 1.10.31  | दामोदर - पण्डित शाखा प्रेमेते प्रचण्ड ।
प्रभुर उपरे सेंहो कैल वाक्य - दण्ड ॥31॥ | | | | | | | अनुवाद | | चैतन्य वृक्ष की दसवीं शाखा दामोदर पंडित भगवान चैतन्य के प्रेम में इतने मग्न थे कि एक बार उन्होंने बिना किसी हिचकिचाहट के भगवान को कठोर शब्दों में फटकार लगा दी। | | | | Damodara Pandita, the tenth branch of the Chaitanya tree, was so moved by his love for Lord Chaitanya that he once rebuked Mahaprabhu with harsh words without any hesitation. | | ✨ ai-generated | | |
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