श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.10.26 
से सब सामग्री यत झालिते भरिया ।
राघव लइया या’न गुपत करिया ॥26॥
 
 
अनुवाद
जब भगवान चैतन्य पुरी में थे, तब दमयंती ने उनके लिए जो भोजन पकाया था, उसे उनके भाई राघव ने दूसरों की जानकारी के बिना थैलों में भरकर ले गए।
 
When Chaitanya Mahaprabhu was in Puri, the food prepared by Damayanti for him was carried by her brother Raghava in a bag, hidden from the eyes of others.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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