श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  1.10.18 
आपने महाप्रभु गाय याँर नृत्य - काले ।
प्रभुर चरण धरि’ वक्रेश्वर बले ॥18॥
 
 
अनुवाद
श्री चैतन्य महाप्रभु स्वयं गा रहे थे, जबकि वक्रेश्वर पंडित नृत्य कर रहे थे, और इस प्रकार वक्रेश्वर पंडित भगवान के चरण कमलों पर गिर पड़े और इस प्रकार बोले।
 
While Vakresvara Pandita was dancing, Sri Chaitanya Mahaprabhu himself sang. Consequently, Vakresvara Pandita fell at Mahaprabhu's lotus feet and spoke as follows.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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