श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 121
 
 
श्लोक  1.10.121 
गौड़ - देश - भक्तेर कैल सङ्क्षेप कथन ।
अनन्त चैतन्य - भक्त ना याय गणन ॥121॥
 
 
अनुवाद
मैंने बंगाल में भगवान चैतन्य के भक्तों का संक्षिप्त विवरण दिया है। वास्तव में उनके भक्त असंख्य हैं।
 
I have given a brief account of Mahaprabhu's devotees in Bengal. In reality, his devotees are countless in number.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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