श्री चैतन्य चरितामृत  »  लीला 1: आदि लीला  »  अध्याय 10: चैतन्य-वृक्ष के स्कन्ध, शाखाएँ तथा उपशाखाएँ  »  श्लोक 104
 
 
श्लोक  1.10.104 
इँहा - सबार यैछे हैल प्रभुर मिलन ।
आगे विस्तारिया ताहा करिब वर्णन ॥104॥
 
 
अनुवाद
मैं बाद में बहुत विस्तार से बताऊंगा कि ये सभी भक्त श्री चैतन्य महाप्रभु से कैसे मिले।
 
I will describe in detail later how all these devotees met Sri Chaitanya Mahaprabhu.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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