श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  3.9.85 
নিরবধি অদ্বৈত এ সব কথা কয
জগতের ত্রাণ লাগি’ কৃপালু হৃদয
निरवधि अद्वैत ए सब कथा कय
जगतेर त्राण लागि’ कृपालु हृदय
 
 
अनुवाद
दयालु अद्वैत प्रभु ने सदैव जगत के उद्धार के लिए इन विषयों का वर्णन किया।
 
The compassionate Advaita Prabhu always described these topics for the salvation of the world.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)