श्री चैतन्य भागवत  »  खण्ड 3: अंत्य-खण्ड  »  अध्याय 9: अद्वैत आचार्य की महिमा  »  श्लोक 79
 
 
श्लोक  3.9.79 
সর্ব-কাল-সিṁহ আমি তোর ভক্তি-বলে
এই বর—’মোরে না ছাডিবা কোন কালে’”
सर्व-काल-सिꣳह आमि तोर भक्ति-बले
एइ वर—’मोरे ना छाडिबा कोन काले’”
 
 
अनुवाद
"आपकी भक्ति के बल से मैं सदैव सिंह के समान शक्तिशाली बना रहूँ। कृपया मुझे यह वर दीजिए कि आप मुझे कभी न त्यागें।"
 
"May I always remain as strong as a lion through the power of your devotion. Please grant me this boon that you will never abandon me."
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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